मिलाद पर ख़ुशी मनाने का अनोखा अंदाज़

शाह वलीउल्लाह मुहद्दिसे देहेलवी के वालिद -ए- गिरामी शाह अब्दुर्रहीम मुहद्दिसे देहेलवी अलैहिर्रहमा मिलाद-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की ख़ुशी में खाना बनवा कर लोगो में तक़सीम करवाया करते थे।
एक मर्तबा इत्तेफ़ाक़न कुछ मयस्सर ना आ सका के कुछ पका कर नियाज़ दिलवा सके लिहाज़ा थोड़े से भुने हुए चने और कन्द पर इक्तिफा करते हुए नियाज़ दिलवाई।

उसी रात हुज़ूर-ए-अकरम ﷺ की ज़ियारत हुई, आप ﷺ की बारगाह में किस्म-किस्म के खाने पेश किये जा रहे थे, इसी दौरान वो भुने हुए चने और कन्द भी पेश किये गए, इंतेहाई ख़ुशी व मस्सरत से आप ﷺ ने वो क़ुबूल फरमाए और अपनी तरफ लाने का इशारा फ़रमाया और थोड़ा सा उस में से तनावुल फ़रमा कर बाक़ी असहाब में तक़सीम फ़रमा दिए।

(ملخصاً: انفاس العارفین، ص118، 119، فرید بک سٹال لاہور)

हमे चाहिए के इख्लास के साथ अपने नबी पाक ﷺ की विलादत की ख़ुशी मनायें ताकी हुज़ूर ﷺ क़ुबूल फ़रमा लें।
ख़ुशी के नाम पर नाजायज़ कामो का इरतेकाब करना ये, हुज़ूर ﷺ की नाराज़गी का सबब है।

अल्लाह त्आला हमे बुज़ुर्गो के नक़्शे कदम पर चलने की तौफीक अता फरमाये
आमीन

अ़ब्दे मुस्तफ़ा

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