जन्नत में आधी आबादी हमारी होगी 

हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद रदिअल्लाहु त'आला अन्हु बयान करते है के रसूलुल्लाह ﷺ ने हम से फरमाया के क्या तुम इस बात से राज़ी नही हो के जन्नत में तुम्हारी तादाद तमाम जन्नतियो की चौथाई हो?
हज़रत इब्ने मसऊद फरमाते है के हम ने खुशी से नारा -ए- तकबीर बुलंद किया फिर हुज़ूर ﷺ ने फरमाया के क्या तुम इस बात से राज़ी नही हो के जन्नत में तुम्हारी तादाद तमाम जन्नतियो की तिहाई हो?
हज़रत इब्ने मसऊद फरमाते है के हम ने खुशी से नारा -ए- तकबीर बुलंद किया फिर हुज़ूर ﷺ ने फरमाया :
मुझे उम्मीद है के जन्नत में तुम्हारी तादाद तमाम जन्नतियो से आधी (50%) होंगी।

(ملتقطاً: صحیح مسلم، باب بیان کون ھذہ الامۃ.... الخ، ر437)

हज़रत अबु सईद खुदरी रदिअल्लाहु त'आला अन्हु की रिवायत में है के आप ﷺ ने इरशाद फरमाया के उस ज़ात की कसम जिस के क़ब्ज़े क़ुदरत में मेरी जान है मेरी ख्वाहिश है की तुम तमाम जन्नतियो के निस्फ (आधे) हो।

(ایضاً، ر440، ملتقطاً)

इस उम्मत पर ये महरबानी सिर्फ और सिर्फ हुज़ूर ﷺ की वजह से है। 
इस हदीस से उन फिरको का रद्द भी हो जाता है जिन की तादाद एक शहर भरने के बराबर भी नही, वो भला आधी जन्नत कैसे भरेंगे?
अलहम्दुलिल्लाह हुज़ूर ﷺ ने ये बिशारत सवादे आज़म,अहले सुन्नत व जमाअत को अता फरमाई है।

अब्दे मुस्तफ़ा

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