कोई हद नहीं 

हज़रते इमाम बौसिरी रहिमहुल्लाहु त'आला लिखते है : 

دع ما ادعته النصاری فی نبیھم
واحکم بما شئت مدحا و احتکم

وانسب الی ذاته ما شئت من شرف
وانسب الی قدرہ ما شئت من عظم

فان فضل رسول اللہ لیس له
حد فیعرب عنه ناطق بفم

"जो ईसाइयो ने अपने नबी के बारे में कही उसे छोड़ कर बाकी हर तरह अपने हबीब ﷺ की शान बयान कर, आप की ज़ात की तरफ हर शर्फ़ और हर अज़मत को बिला झिझक मंसूब कर दे, आप की फ़ज़ीलत और शान की कोई हद नही फिर आप की तारीफ का हक कोई किस तरह अदा कर सकता है"

(ملخصاً: تجھ سا کوئی نہیں، ص6)

तेर तो वस्फ एब -ए- तनाही से है बरी
हैरा हूँ मेरे शाह मैं क्या क्या कहूँ तुझे

अब्दे मुस्तफ़ा

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