दुनिया के लिए इल्म

नबीय्ये करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया के जो अल्लाह की रज़ा के इलावा किसी और मक़सद के लिए इल्मे दीन हासिल करे तो वो अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।

(جامع الترمذی، باب ماجاء فیمن یطلب بعلمه الدنیاء، ح2655)

सुनन तिर्मज़ी के जिस बाब में ये हदीस है उस का उनवान है : 

"باب ماجاء فیمن یطلب بعلمه الدنیاء"

यानी "जो इल्म के ज़रिए दुनिया का तलबगार हो" और इसी बाब में एक और हदीस कुछ यूं है कि नबीय्ये करीम ﷺ ने इरशाद फरमाया : 

जो शख़्स इल्म इस लिए हासिल करे ताकि उस के ज़रिए उलमा का मुकाबला करे या जुहला के साथ बहस करे या लोगो की तवज्जोह अपनी तरफ मबज़ुल करे तो अल्लाह त'आला उसे जहन्नम में दाखिल करेगा।

(ایضاً، ح2654)

अल्लाह त'आला हमे फ़क़त अपनी रज़ा के लिए इल्म हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।

अब्दे मुस्तफ़ा

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