सिहाह सित्ता और हज़रते अमीर -ए- मुआविया

सहाबी -ए- रसूल, कातिब -ए- वही, हज़रते सैय्यिदुना अमीर -ए- मुआविया रदिअल्लाहु त'आला अन्हु से अहकाम -ए- शरीअत के सिलसिले में असहाब -ए- सित्ता ने दर्जे ज़ेल अहादीस रिवायत की हैं :

(1) औरतों का बालों में जूड़ा बनाने की हुरमत की हदीस।
(بخاری و مسلم) 

(2) मेरी उम्मत का एक गिरोह हमेशा हक़ के हमराह गालिब रहेगा।
(بخاری و مسلم) 

(3) नमाज़े असर के बाद नफ़ल पढ़ने से मना की हदीस।
(بخاری، مسلم، ابو داؤد، نسائی) 

(4) माँगने में इसरार और झगड़ना मना है। 
 (مسلم) 

(5) ये बात हमेशा क़ुरैश में रहेगी।
(بخاری) 

(6) शराब नोशी करने वाले को कोड़े मारना और चौथी बार पीने पर क़त्ल कर देना। 
(ابو داؤد و. ترمذی) 

(7) रेशम, सोना और दरिन्दों की खाल पहनना मना है।
(ابو داؤد) 

(8) उम्मत -ए- मुहम्मदिया का फिरक़ों में तक़सीम होना।
(ابو داؤد، نسائی، ابن ماجہ) 

(9) इमाम से पहले रुकू वा सुजूद करने की मुमान'आत।
(ابو داؤد و ابن ماجہ) 

(10) शिगार की शादी करना मना है।
(ابو داؤد) 

(11) इन्होने रसूलुल्लाह की तरह वुज़ू किया।
(ابو داؤد) 

(12) नोहा गिरी और वावेला मना है।
(ابن ماجہ) 

(13) लोगों के क़ियाम पर राज़ी होना मना है।
(ابو داؤد و ترمذی) 

(14) मद'हा सराई में मुबालगा करना मना है।
(ابن ماجہ) 

(15) हर नशा आवर चीज़ की हुरमत।
(ابن ماجہ و ابو داؤد) 

(16) नमाज़ में सहव वा निस्यान वाले का हुक्म। 
(نسائی) 

(17) हज्जो उमरा में क़िरान करना मना है।
(ابو داؤد) 

(18) हज्जो उमरा के बाद बाल काटना।
(بخاری و مسلم) 

(19) जिमा के वक़्त पहने हुये कपड़े में नमाज़ पढ़ना अगर उस में ना पाकी का असर ना हो।
(ابو داؤد، نسائی، ابن ماجہ) 

(20) दस मुहर्रम का रोज़ा फर्ज़ नहीं है।
(بخاری، مسلم، نسائی) 

(21) हिजरत खत्म नहीं हुई है। 
(ابو داؤد) 

(22) सोना पहनना मना है मगर टुकड़े टुकड़े किया हुआ। 
(ابو داؤد و نسائی) 

(23) मुबहम कलाम से लोगों नें मुगालता पैदा करने से मना किया गया है।
(ابو داؤد) 

(24) जुम'अह और नफली नमाज़ के दरमियान कलाम या मस्जिद से खुरूज कर के फर्क़ करना।
(مسلم و ابو داؤد) 

(25) अल्लाह त'आला हर गुनाह मुआफ़ फ़रमा देगा मगर क़त्ले मोमिन और शिर्क बिल्लाह नहीं।
(نسائی و ابو داؤد) 

(26) सिफारिश करो अज्रो सवाब पाओगे।
(ابو داؤد و نسائی) 

(27) लोगों को औरात (हर छुपाने वाली चीज़) का ततब्बो करना मकरूह है।
(ابو داؤد و ترمذی) 

(28) अल्लाह त'आला जिस बन्दे से भलाई का इरादा फरमाता है, उसे दीन की समझ अता कर देता है।
(بخاری و مسلم) 

(29) लइलतुल क़द्र रमज़ानुल मुबारक की सत्ताइस्वीं रात है।
(ابو داؤد) 

(30) अज़ान देने वाले की अज़मत व फज़ीलत पर हदीस।
(مسلم و ابن ماجہ) 

(31) अज़ान का जवाब देना।
(بخاری و نسائی) 

(32) ज़िक्र के हलक़ात की फज़ीलत।
(مسلم و ترمذی) 

(33) हज़रते तल्हा की फज़ीलत
(ترمذی و ابن ماجہ) 

(34) हुज़ूर -ए- अकरम ﷺ की तारीख -ए- विसाल कि आप उस वक़्त 63 बरस के थे।
(مسلم و ترمذی) 

(35) फर्ज़ नमाज़ के बाद की दुआ।
(بخاری و مسلم) 

(36) खैर इन्सान की फितरी आदत है।
(ابن ماجہ) 

(37) दुनिया में इम्तिहान और परेशानी के सिवा कुछ नहीं बचा।
(ابن ماجہ) 

(38) आमाल की मिसाल उस बरतन की है जिस का निचला हिस्सा साफ सुथरा होगा तो ऊपर वाला हिस्सा भी।
(ابن ماجہ) 

(39) "ان الذين یکنزون الذھب والفضۃ"
ये आयत किन लोगों के हक़ में नाज़िल हुई।

(فتاوی منصوریہ، ج2، ص227) 

अब्दे मुस्तफ़ा

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