क्या आप जानते हैं कि सहाबए किराम में से कोई बहरा न था! 


हाफ़िज़ इब्ने हजर (मुतवफ़्फ़ा 852 हिजरी) फ़रमाते हैं कि हुजूर ﷺ की हयात शरीफ़ में सहाबए किराम में से कोई असम या'नी बहरा न था और येह आप ﷺ की करामात में से है क्यूंकि आप  उन के लिये अहकामे इलाही के मुबल्लिग थे और बहरापन इस काम के सहूलत के साथ होने से माने (रुकावट) होता है बर अक्स ना बीनाई के कि वोह मानेअ नहीं होती। यानी जो अंधा होता है वो सुन तो सकता ही है। 


(نسیم الریاض، ج1، ص397 بہ حوالہ سیرت رسول عربی، ص260)


अब्दे मुस्तफ़ा

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