अपनों को दुश्मनों के सामने रुस्वा ना कीजिये


हज़रते उमर फ़ारूक़ रदिअल्लाहु त'आला अन्हु ने जंगी लश्करों के उमरा (Head, Commanders) को लिख कर भेजा कि :


कोई भी अमीरे लश्कर चाहे वो छोटा हो या बड़ा किसी मुसलमान पर हद्द (इस्लामी सज़ा) जारी न करे जब तक उस का लश्कर दुश्मन के हुदूद (Boundaries) से ना निकल जाये क्योंकि मुझे डर है कि कहीं वो दुश्मनों के सामने सज़ा पाने के सबब ग़ैरत में आ कर खुदा नाख्वास्ता मुशरिकीन से मिल जाये।


(مصنف عبد الرزاق، کتاب الجھاد، ج5، ص134، ح9433 بہ حوالہ فیضان فاروق اعظم) 


अगर कोई अपना, सज़ा के क़ाबिल भी हो तो उसे अपनों के बीच सज़ा देनी चाहिये या कोई गलती हो तो सब के सामने रुसवा करने के बजाये तन्हाई में उसकी इस्लाह करनी चाहिये ताकि वो अपना ही रहे, ग़ैरों का ना हो जाये।


अब्दे मुस्तफ़ा

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