आला हज़रत की नसीहत 


इमामे अहले सुन्नत सरकार आला हज़रत रहीमुल्लाहु त'आला नसीहत करते हुए इरशाद फरमाते हैं!


"देखो नर्मी के जो फवाईद है वो सख़्ती में हरगिज़ हासिल नहीं हो सकते, जिन लोगों के अकाईद मुज़ब्ज़ब हो उनसे भी नर्मी बरती जाए कि वो ठीक हो जाएंगे, ये जो वहाबिया में बड़े बड़े हैं इब्तेदा बहुत नरमी की गई मगर चूंकि उनके दिलों में वहाबियत रासीख हो गई थी और मिसदाक़

ثم لا یعدون

हक न माना उस वक्त सख्ती बरती गई!


(ملفوظاتِ اعلیٰ حضرت، ص34)


इससे वो लोग नसीहत ले जो हर एक के साथ एक सा सुलूक करते हैं और सब के साथ शिद्दत इख्तियार करते हैं और उसका नतीजा ये होता है कि कई सादा लोह जो अभी गुस्ताख व गुमराह नहीं हुए होते वो भी इनकी शिद्दत देख कर अहले सुन्नत से मुतनफ्फर होते हैं और वहाबियों के हत्थे पड़ जाते हैं और अपना दीन व ईमान बर्बाद कर बैठते हैं!


जो लोग अहले सुन्नत की तबलीग़ करना चाहते हैं वो पहेले उसूल -ए- तबलीग़ सीख ले कि किसके साथ कैसे पेश आना है कहीं ऐसा ना हो कि आप बीमार का इलाज करने जाए और बीमार को मार ही आएं!


अब्दे मुस्तफ़ा

Post a Comment

Leave Your Precious Comment Here

Previous Post Next Post