हज़रते खदीजा की याद


जिनसे प्यार हो उनकी यादें जब आती हैं तो दिल पे गहरा असर करती हैं। हज़रते खदीजा से हुज़ूर ﷺ की मुहब्बत को लफ़्ज़ों से बयान नहीं किया जा सकता।


एक मर्तबा हज़रते खदीजा की बहन हज़रते हाला ने हुज़ूर ﷺ की बारगाह में हाज़िर होने की इजाज़त तलब की तो उनकी आवाज़ हज़रते खदीजा की आवाज़ से बहुत मिलती थी, आप ﷺ को हज़रते खदीजा का इजाज़त तलब करना याद आ गया और आप ने झुरझुरी ली। (जिस्म में हल्की कपकपी)


(صحیح البخاری، کتاب المناقب، الحديث3821) 


इसके अलावा हुज़ूर ﷺ हज़रते ख़दीजा की सहेलियों का इकराम फ़रमाया करते थे, उनके पास तोहफ़े भेजते।


(الادب المفرد) 


अल्लाह त'आला हमें भी खुलूस के साथ मुहब्बत की तौफ़ीक़ दे।


अब्दे मुस्तफ़ा ऑफिशियल

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