हुज़ूर से हमने क्या सीखा?


हुज़ूर -ए- अकरम ﷺ के नीचे एक मर्तबा नर्म बिस्तर बिछा दिया गया तो आप ने फरमाया : मैं दुनिया में आराम करने नहीं आया। 


(شمائل ترمذی، ص22)


आप हर वक़्त अल्लाह का ज़िक्र करते थे। 


(بخاری و مسلم)


आप एक दिन में दो मर्तबा कभी भी अपने पेट को नहीं भरते थे। 


(ترمذی، 2356)


आप ने कभी दो दिन मुसलसल गंदुम की रोटी नहीं खाई हत्ता के विसाल हो गया। 


(مسلم، 7445)


आपने कभी आईन्दा के लिए ज़खीरा नहीं किया। 


(ترمذی، 2362)


आप अपने घर के काम काज खुद करते थे और अहले खाना का हाथ बटाते बटाते नमाज़ का वक़्त आ जाता तो नमाज़ के लिए निकल जाते। 


(بخاری، 676)


हम अगर खुद को देखें तो दुनिया से दिल लगा बैठे हैं, 

लज़ीज़ खाने वो भी एक दिन में तीन वक़्त!

अच्छे कपड़े, नर्म बिस्तर और फिर आईन्दा के लिए हर चीज़ का ज़खीरा!


अल्लाह त'आला हमें दुनिया की रंगीनियों से बचाए


अब्दे मुस्तफ़ा

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