रैप सौंग्स और नात


नात सुनने से इश्के रसूल में इजाफ़ा होता और ये एक इबादत भी है पर इसे भी कुछ लोगों ने खेल कूद का सामान बना लिया है! 

कुछ नात पढ़ने वाले गानों की तर्ज़ को अपनाते हैं और कुछ रैप स्टाइल में नात पढ़ते हैं। 

इनसे परहेज करना जरूरी है। 


बहरुल उलूम अल्लामा मुफ्ती अब्दुल मन्नान आज़मी रहिमहुल्लाहु त्आला लिखते है के अशआर और गीतों के मुख्तलफ वजन और बहरें होती है जिनमें हर किस्म  के मज़मून को नज़्म किया जा सकता है और मुखतलफ लहजे और धुन में गाया जा सकता है इसलिए कोई कायदा ए कुल्लिया नहीं बताया जा सकता के फुला फुला तर्ज़ पर नात पढ़नी चाहिए और फुला पर नहीं। 

हर नात शरीफ के लिए पुर वक़ार और संजीदा लबो लेहजा होना चाहिए और गैर मुहज्जब लबो लहजे से परहेज़ करना चाहिए। 


(فتاوی بحر العلوم، ج5، ص329)


मुफ्ती मुहम्मद क़ासिम जियाउल क़ादरी लिखते है के मशहूर गानों की तर्ज़ पर नात पढ़ना मना है लिहाजा इससे एहतिराज किया जाए। 

हां अगर किसी ने नात पर कोई तर्ज़ लगाई और बाद में किसी ने उसी तर्ज पर गाना गाया तो अब उस तर्ज़ पर नात पढ़ने में हरज नहीं। 


(فتاوی یورپ و برطانیہ، ص 385)


अब्दे मुस्तफा

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