किन की लिखी हुयी नातें सुनें और पढें?


नात शरीफ पढ़ना और सुनना दोनों इबादत और सआदत है।

नात शरीफ पढ़ना सहाबा ए किराम अलैहिमुर रिदवान की सुन्नत है की असहाबे रसूल भी सरकारे वाला तबार ﷺ की बारगाह में नात सुनाने का शर्फ हासिल करते थे।

अब ये सवाल ज़हन मे आता है की नात तो कई एक लोगों ने लिखी है तो किस के कलाम सुनने और पढ़ने चाहिये जो शरई गलतियों से पाक हो।


इसी लिये कुछ मोअतबर और मुसतनद बुजुर्गों के असमाए गिरामी हाजर हैं जिन के क़लाम अल्हम्दुलिल्लाह गलतियों से पाक हैं :


आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खां बरैल्वी 

(حدائقِ بخشش)

शहजादा ए आला हज़रत हुज्जतूल इस्लाम अल्लामा हामिद रज़ा खां बरैल्वी

(بیاضِ پاک)

शहजादा ए आला हज़रत मुफ्तिये आज़म हिन्द अल्लामा मुस्तफ़ा रज़ा खां नूरी बरैल्वी

(سامان بخشش)

खलीफा ए आला हज़रत सदरूलफाज़िल अल्लामा सय्यद नइमुद्दिन मुरादाबादी

(ریاضِ نعیم)

खलीफा ए आला हज़रत मुहद्दीसे आज़म सय्यद मुहम्मद अशरफ किच्छोछवी

(فرش پر عرش)

बिरादरे आला हज़रत, मौलाना हसन रज़ा खां बरैल्वी

(ذوق نعت)

खलीफा ए आला हज़रत मद्दहाहुल हबीब अल्लामा जमीलुर रहमान क़ादरी रज़वी बरैल्वी 

(قُبالۂ بخشش)

मुफस्सिरे शहीर हक़ीमुल उम्मत मुफ्ती अहमद यार खां नईमी 

(دیوانِ سالک)

हुजूर ताजुश्शरियाह अल्लामा मुफ्ती अख्तर रज़ा खां अज़हरी बरैल्वी 

(سفینۂ بخشش)

अमीरे अहले सुन्नत हज़रत मौलाना इलयास अत्तार क़ादरी रज़वी

(وسائلِ بخشش)

शेखुल इस्लाम अल्लामा सय्यद मदनी मियां अशरफी जिलानी

(بارانِ رحمت)


अब्दे मुस्तफ़ा

Post a Comment

Leave Your Precious Comment Here

Previous Post Next Post