जहाँ जैसे हो काम कीजिये


आप जहाँ हैं, जिस हालत में हैं, उसी को ग़नीमत जान कर काम कीजिये।

जो नहीं है उस के इंतिज़ार में खाली बैठे रहना दुरुस्त नहीं है बल्कि आज से आप काम करेंगे तो फिर आपका इंतिज़ार वो शय करेगी जिसे आप हासिल करना चाहते हैं।


एक मज़बूत निज़ाम के लिये ज़रूरी है कि अपने उसूलों को फ़रामोश ना किया जाये और हर शख़्स अपने हिस्से का काम पूरी लगन के साथ करे।

अगर दो शोबों में काम करने वाले अपना शोबा छोड़ कर एक दूसरे की जगह रहेंगे तो ना ये काम होगा और ना वो लिहाज़ा अपना काम जो आपको मिला है, उसे अच्छी तरह कीजिये।


मिसाल के तौर पर तहरीरी काम करने वाले पूरी ईमानदारी, मेहनत और लगन के साथ लिखें,

जिन्हें बोलने का मौक़ा मिला है वो हक़ बोलें।

जिसे किसी और जगह जिद्दो जहद का मौक़ा मिले तो वो वहाँ क़ुरबानी दे और इसी तरह एक निज़ाम अच्छी तरह बरक़रार रहता है।


हर तरह के लोग कि जिनकी क़ुव्वत ज़ाहिर में अपने अपने शोबों में अलग-अलग जिहत में काम करती है पर अस्ल में सब एक दूसरे से मुन्सलिक, ज़रूरी और एक दूसरे के हक़ में मुअविन होती हैं जिस तरह जिस्म के हर हिस्से का अलग अलग काम और काम करने का तरीका है पर सबकी अहमियत जिस्म में बिल्कुल वाज़ेह है कि एक कमज़ोर पड़े या रुक जाये तो बाक़ी पर भी फ़र्क़ पड़ता है।


इल्मी, अमली, फ़िक्री, फ़लाही और मुआशरती और हर ऐतबार से काम की ज़रूरत है।

आप को जिस में जितना काम करने या मदद करने का मौक़ा मिले, पीछे ना हटें बल्कि जिस्म के किसी एक हिस्से को ही ठीक करने का ज़हन बना लें।


अल्लाह त'आला हमसे अपनी रज़ा वाले काम ले।


अब्दे मुस्तफ़ा ऑफिशियल

Post a Comment

Leave Your Precious Comment Here

Previous Post Next Post