अबू बकर बिन अ़फ्फान, उस्माने फारूक़....


जाहिज़ बयान करते हैं कि मैं वासित गया और जुम्आ के दिन सब से पहले जाकर जामा मस्जिद में बैठ गया तो मैने एक लम्बी दाढ़ी वाला आदमी देखा कि इतनी लम्बी दाढ़ी मैने पहले कभी नहीं देखी थी।

वो दूसरे आदमी से कह रहा था कि सुन्नत को मज़बूती से पकड़ो ताकि जन्नत में दाखिल हो जाओ।

उस ने पूछा कि वो सुन्नत क्या है?

तो कहने लगा कि वो सुन्नत अबू बकर बिन अ़फ्फान, उस्मान अल फारूक़, उमर अस सिद्दीक़, अली इब्ने अबी सूफियान और मुआविया बिन शैबान के साथ मुहब्बत है।


उस आदमी से मैने पूछा कि मुआविया बिन शैबान कौन है? वो कहने लगा कि ये हामिलीने अर्श में से एक सालेह आदमी हैं और हुज़ूर -ए- अकरम ﷺ का कातिब और आप की बेटी आइशा का शौहर होने की बिना पर आप का दामाद है।

(لا حول و لا قوۃ الا باللہ) 


(اخبار الحمقی والمغفلین لابن جوزی)


ऐसा दीन बयान करने वाले आज भी नज़र आते हैं। एक तो गलत बयानी करते हैं ऊपर से इतने एतिमाद (कॉन्फ़िडेन्स) के साथ बयान करते हैं कि थोड़ी देर के लिये सहीह मालूमात रखने वाले को भी कन्फ्यूज़ कर देते हैं। अल्लाह त'आला हमें ऐसे लोगों से बचाये।


अ़ब्दे मुस्तफ़ा

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