बुरी सोहबत का बुरा नतीजा


हज़रत अ़ल्लामा मुहम्मद बिन अहमद ज़हबी रहमतुल्लाह अ़लैह फरमाते हैं : एक शख्स शराबियो की सोहबत में बैठा था। जब उसकी मौत का वक़्त क़रीब आया तो किसी ने कलिमा शरीफ पढ़ने की तलकीन की तो कहने लगा : "तुम पियो और मुझे भी पिलाओ।"


मआज़ अल्लाह बगैर कलमा पढ़े मर गया।


(کتاب الکبائر،ص١٠٣، فیضانِ سنت،ص۴۳۵)


बुरी सोहबत वाक़ई दुनिया व आखिरत में नुक़्सान का बाइस है और अच्छी सोहबत दुनिया व आखिरत दोनों के लिए फाइदेमंद।


जो लोग ये कहते हैं कि हम थोड़ी ये बुराई कर रहे हैं हम तो बस उनके साथ बैठ रहे, वो बड़े धोके में है कि आज ना सही मगर एक दिन वो भी इस बुराई में मुलव्विस हो ही जायेगा जिस बुराई करने वालों के साथ वो बैठे उठे हैं।


इंसान कोइले की भट्टी के क़रीब से भी गुज़रे तो कपड़े ख़राब हो जाते है। ऐसे ही बुरी सोहबतें है जो आप पर अपना बुरा रंग चढ़ा देती है और आप को अंदाज़ा भी नहीं होता।


इसीलिये इंसान अगर दुनिया व आखिरत की भलाई चाहता है तो अच्छों की मजलिस में बैठे और बुरी सोहबतों से परहेज़ करे।


अ़ब्दे मुस्तफ़ा

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