कुंवारा यानी मिस्कीन


आक़ा ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि :


"مِسْكِينٌ مِسْكِينٌ رَجُلٌ لَيْسَتْ لَهُ امْرَأَةٌ"، قِيلَ: "يَا رَسُولَ اللهِ! وَإِنْ كَانَ غَنِيًّا ذَا مَالٍ؟" قَالَ: "وَإِنْ كَانَ غَنِيًّا مِنَ الْمَالِ"، قَالَ: "وَمِسْكِينَةٌ مِسْكِينَةٌ امْرَأَةٌ لَيْسَ لَهَا زَوْجٌ"، قِيلَ: "يَا رَسُولَ اللهِ! وَإِنْ كَانَتْ غَنِيَّةً أَوْ مُكْثِرَةً مِنَ الْمَالِ؟" قَالَ: "وَإِنْ كَانَتْ."


"मिस्कीन है, मिस्कीन है वो मर्द, जिसकी बीवी ना हो, 

अर्ज़ की गयी : ऐ अल्लाह के रसूल! अगर्चे (वो मर्द) माल वाला अमीर हो?

फ़रमाया : हाँ, अगर्चे माल वाला अमीर हो।


फिर आक़ा ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: मिस्कीना है, मिस्कीना है वो औरत, जिसका शौहर ना हो,

अर्ज़ की गयी : ऐ अल्लाह के रसूल! चाहे वो (औरत) अमीर हो, या ज़्यादा माल वाली हो? फ़रमाया: हाँ (चाहे माल वाली) हो।


(शुअ़बुल् ईमान (लिल बैहक़ी, 458 हिजरी, ह़दीस 5097, जिल्द 7, सफ़हा 338, पब्लिकेशन : मकतबतुर्रुश्द (रियाद), पहला एडीशन, 1423 हिजरी बा मुताबिक़ 2003 ईस्वी)


अ़ब्दे मुस्तफ़ा

क़ासिमुल क़ादिरी

Post a Comment

Leave Your Precious Comment Here

Previous Post Next Post